गेस्ट लेक्चरर को भी मिलेगा मातृत्व अवकाश का वेतन, हाईकोर्ट ने सरकार की दलील की खारिज

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बिलासपुर : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महिला कर्मचारियों के मातृत्व अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी महिला कर्मचारी को केवल नियमित सरकारी कर्मचारी नहीं होने के आधार पर मातृत्व अवकाश की अवधि का वेतन देने से वंचित नहीं किया जा सकता। मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 के तहत गेस्ट लेक्चरर और अन्य अस्थायी आधार पर काम करने वाली महिलाएं भी निर्धारित शर्तें पूरी करने पर मातृत्व लाभ की हकदार हैं।

जस्टिस बिभु दत्त गुरु की सिंगल बेंच ने राज्य के उच्च शिक्षा विभाग और संबंधित अधिकारियों को याचिकाकर्ता के मातृत्व अवकाश की अवधि के बकाया वेतन के दावे पर नियमानुसार तीन महीने के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया है।

यह मामला कोंडागांव के शासकीय गुंडाधुर पीजी कॉलेज में राजनीति विज्ञान की गेस्ट लेक्चरर पुष्पा जायसवाल से जुड़ा है। उन्होंने 16 अगस्त 2024 को कॉलेज में कार्यभार संभाला था। मातृत्व अवकाश पूरा होने के बाद वह 19 अगस्त 2026 को दोबारा ड्यूटी पर लौटीं।

मातृत्व अवकाश की अवधि का वेतन प्राप्त करने के लिए उन्होंने 29 मई और 5 अगस्त 2026 को संबंधित अधिकारियों के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया था। हालांकि, इन आवेदनों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने न्याय के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 की धारा 5 के तहत उन्हें मातृत्व अवकाश के दौरान वेतन प्राप्त करने का कानूनी अधिकार है।

वहीं, राज्य सरकार ने इसका विरोध करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता नियमित सरकारी कर्मचारी नहीं हैं, इसलिए उन्हें इस अधिनियम के तहत मातृत्व लाभ का अधिकार नहीं दिया जा सकता।

कोर्ट ने राज्य सरकार की दलील को स्वीकार नहीं किया। हाईकोर्ट ने कहा कि मातृत्व लाभ अधिनियम में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जो इस लाभ को केवल नियमित महिला कर्मचारियों तक सीमित करता हो। कानून में कैजुअल, दैनिक वेतनभोगी या गेस्ट आधार पर काम करने वाली महिलाओं को मातृत्व लाभ से बाहर नहीं रखा गया है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि गर्भावस्था के अंतिम चरण में महिला से कठिन परिश्रम कराना उसके स्वास्थ्य और गर्भस्थ शिशु के लिए नुकसानदायक हो सकता है। मातृत्व अवकाश का उद्देश्य ही महिलाओं को ऐसी परिस्थितियों से सुरक्षा प्रदान करना है।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2024 के डॉ. कविता यादव बनाम सचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय मामले का उल्लेख किया। इस फैसले में स्पष्ट किया गया था कि मातृत्व लाभ अधिनियम की धारा 5(2) की निर्धारित शर्तें पूरी होने पर महिला को मातृत्व लाभ का अधिकार मिलता है। रोजगार की अवधि समाप्त होने के बाद भी कुछ परिस्थितियों में यह अधिकार बरकरार रह सकता है।

इसके अलावा कोर्ट ने दिल्ली नगर निगम बनाम महिला कर्मचारी मस्टर रोल मामले का भी हवाला दिया, जिसमें दैनिक वेतन पर काम करने वाली महिला कर्मचारियों को मातृत्व लाभ देने के अधिकार को मान्यता दी गई थी।

हाईकोर्ट ने यह भी गौर किया कि राज्य सरकार ने इस बात से इनकार नहीं किया कि पुष्पा जायसवाल नियमित लेक्चरर के समान ही कार्य करती हैं। ऐसे में केवल गेस्ट लेक्चरर होने के आधार पर उन्हें मातृत्व लाभ से वंचित करना उचित नहीं है।

कोर्ट ने कहा कि जब संबंधित अधिकारियों ने मातृत्व अवकाश स्वीकृत किया था, तो उस अवधि का वेतन जारी करने की जिम्मेदारी भी उनकी थी। लिहाजा, अधिकारियों को याचिकाकर्ता के बकाया वेतन के दावे पर तीन महीने के भीतर नियमानुसार फैसला लेने का निर्देश दिया गया है।

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