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कुत्तों के बढ़ते आतंक से शहर के नागरिक हुए भयभीत,  रात्रि मेंं सूनसान इलाकों पर अकेले आवागमन पर बढा खतरा

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दुर्ग (चिन्तक)। शहर के विभिन्न वार्डो मे कुत्तो की संख्या में भारी इजाफा हो गया है। हर गली व चौक चौराहो पर कुत्तों का झुंड नजर आता है। परिणाम स्वरूप रात्रि कालीन समय में लोगो का घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। कुत्तो की बढ़ती संख्या पर रोक लगाने नगर निगम द्वारा कोई पहल नही की जा रही है। ऐसा प्रतीत होता है कि निगम किसी बड़ी जानलेवा घटना के घटित होने का इंतजार कर रहा है।
यहां गौरतलब है कि नगर निगम की पिछली परिषद ने साठ लाख रूपए की लागत से शहर की सीमा से बाहर जेवरा सिरसा के पास डाग हाउस का निर्माण किया था जिसमें शहर में घूम रहे आवारा किस्म के कुत्तों को पकड़कर रखा जा रहा था। उन्हें शहर के विभिन्न होटल व रेस्टोरेंट से बची खाद्य सामग्रियों को ले जाकर भोजन के लिए दिया जा रहा था लेकिन यह डाग हाउस भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया।

डाग हाउस में मौजूद कुत्ते भाग गये और डाग हाउस भी बंद हो गया। वर्तमान परिषद द्वारा कुत्तो की नसबंदी की योजना बनाई गयी थी और नसबंदी का काम भी शुरू किया गया था लेकिन विपक्ष के पार्षदो के विरोध के कारण यह कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया। इधर कुत्तो की संख्या में लगतार बढ़ोतरी होती गयी। वर्तमान में शहर के लगभग सभी साठ वार्डो में हर गली व चौक चौराहों में दर्जनो की संख्या में कुत्तो का झुंड विद्यमान है। भीषण गर्मी के मौसम मेंं कुत्तो के पागल हो जाने का भी खतरा बना रहता है। फलस्वरूप नागरिक भयभीत है लेकिन नगर निगम अभी तक इसके लिए कोई निश्चित कार्य योजना बनाकर कोई पहल नही कर पाया है।
भोजन नहीं मिलने से खूंखार हो रहे है कुत्ते
नगर निगम व्दारा रिक्शों के माध्यम से कचरे का संग्रहण किया जा रहा है। लोग इसमें घर से बची खाद्य सामग्रियों को भी डाल रहे है। इस वजह से कुत्तों को भाजन नहीं मिल पा रहा है। भोजन नही मिलने की वजह से कुत्ते खूंखार हो गए है। कोई भी व्यक्ति बैग में सामान लेकर जाता है तो भोजन की आशंका से उसके पीछे भागने लगते है। जिससे जानमाल का खतरा भी बढ़ जाता है।

छोटे बच्चों को अकेला न छोड़े
शहर के नागरिकों को इस विषम परिस्थिति में सावधान रहने की सलाह दी गई है। उन्हे कहा गया है कि घर के छोटे बच्चों को कभी भी बाहर अकेला न छोड़े। छोटे बच्चों को अकेला देखकर कुत्ते इन पर हमला कर सकते है। छोटे बच्चों पर कुत्तों के हमले की कई घटनाएं दीगर जिलों में सामने आई है।
प्रशासन से पहल की दरकार
जिला प्रशासन से इस मामले में सीधे पहल करने की मांग नागरिकों व्दारा की गई है। नागरिकों का कहना है कि कुत्तों की बढ़ती संख्या पर लगाम लगाने प्रभावी पहल नही की गई तो शहर में कोई भी बड़ी जानलेवा घटना घटित हो सकती है।