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न्यायिक आदेश की खुली अवहेलना, आारोपी को जेल दाखिले के दौरान वकीलों ने रोका रास्ता, पुलिस कर्मियों के साथ की झुमाझटकी

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रायपुर। जेल के बाहर का एक वीडियो वायरल हुआ है। इसमें न्यायिक आदेश की खुली अवहेलना और पुलिस प्रशासन के कार्य में बाधा का सनसनीखेज मामला राजधानी रायपुर में सामने आया है। इस वीडियो में देखा जा सकता है कि वारंट जारी होने के बाद भी आरोपी को जेल दाखिल करने से पुलिस का रास्ता रोका जा रहा है। पुलिस कर्मियों के साथ झूमाझटकी भी हुई। जेल वारंट को अधिवक्ताओं द्वारा जबरन छीनकर उसे फाड़ने का प्रयास किया गया, जो सीधे-सीधे न्यायालय के आदेश का घोर अपमान है।

जानकारी के अनुसार  अपराध क्रमांक 182/25 के तहत आरोपित व्यक्ति के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 296, 115(2), 351(2) के तहत प्रकरण दर्ज है। एसडीएम न्यायालय से जेल वारंट भी विधिवत रूप से जारी किया जा चुका था। पुलिस जब आरोपी को जेल दाखिल कराने ले जा रही थी, तब कुछ अधिवक्ताओं द्वारा लगभग पौन घंटे तक पुलिस बल को घेर कर आरोपी को जेल दाखिला नहीं करने दिया गया। एक मीडियो रिपोर्ट के अनुसार अधिवक्ताओं और आरोपी के परिजनों द्वारा बार-बार कहा गया – “देखते हैं अब कैसे लेकर जाते हो, जेल नहीं जाने देंगे।” इस बीच, जब तेलीबांधा थाना की एक महिला पुलिस अधिकारी ने स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास करते हुए एक अधिवक्ता से उसका नाम पूछते हुए कहा, “मैं माननीय जिला एवं सत्र न्यायाधीश (Hon’ble District and Sessions Judge) महोदय को आपके नाम से शिकायत करुंगी, कृपया अपना नाम बता दीजिए,” तब अधिवक्ता ने घमंडपूर्वक उत्तर दिया- “नाम जानकर क्या करोगी? कल तो वैसे भी पता चल जाएगा।”