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आर्थिक स्थिति मजबूत हो तो अनुकंपा नियुक्ति का औचित्य नहीं बनता- हाईकोर्ट

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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने उस महिला की याचिका खारिज कर दी, जिसने पति की मृत्यु के बाद अनुकंपा नियुक्ति की मांग यह कहते हुए की थी कि परिवार का कमाने वाला सदस्य उसकी भरण-पोषण की जिम्मेदारी निभाने में असमर्थ है। अदालत ने पाया कि परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत है, इसलिए अनुकंपा नियुक्ति का औचित्य नहीं बनता।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य केवल परिवार को अचानक उत्पन्न हुए वित्तीय संकट से उबारना है। इसे परिवार के किसी सदस्य को रोजगार देने के सामान्य साधन के रूप में नहीं देखा जा सकता।

मृतक कर्मचारी पंजाब नेशनल बैंक में दफ्तरी के पद पर कार्यरत थे। उनके निधन के बाद पत्नी ने अनुकंपा नियुक्ति हेतु आवेदन किया था, जिसे बैंक ने इस आधार पर अस्वीकार कर दिया कि परिवार आर्थिक रूप से सक्षम है। इस निर्णय के खिलाफ मृतक की पत्नी और पुत्र ने हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल की थी, जिसे एकल पीठ ने 6 मार्च 2024 को खारिज कर दिया था। इसके बाद अपीलार्थियों ने डिवीजन बेंच के समक्ष अपील दायर की थी।

अपील में पत्नी ने तर्क दिया कि उनका छोटा बेटा सरकारी नौकरी में होने के बावजूद परिवार को आर्थिक सहयोग देने में असमर्थ है। उनके अनुसार, कृषि भूमि की आय और टर्मिनल लाभ पर बैंक ब्याज कटौती के बाद परिवार को केवल 15,573 रुपये की मासिक पारिवारिक पेंशन ही मिलती है। हालांकि, अदालत ने पाया कि समग्र परिस्थितियों को देखते हुए परिवार को तत्काल वित्तीय संकट का सामना नहीं करना पड़ रहा है, इसलिए अनुकंपा नियुक्ति का दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता।

 

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