छात्रों की मार्कशीट में गड़बड़ी पर शिक्षा विभाग सख्त, बस्तर के 7 BEO को नोटिस जारी

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बस्तर : बस्तर में शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही ने हजारों विद्यार्थियों का भविष्य सवालों के घेरे में ला दिया है। जिले में 5वीं और 8वीं बोर्ड पैटर्न परीक्षा की करीब 2,380 मार्कशीट में गंभीर त्रुटियां मिलने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। मामला सामने आते ही बस्तर कलेक्टर आकाश छिकारा ने सख्ती दिखाई और जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने जिले के 7 खंड शिक्षा अधिकारियों (BEO) को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। सवाल यह है कि जब बच्चों के भविष्य का सवाल था, तब जिम्मेदार अधिकारी आखिर कर क्या रहे थे?

मार्कशीट में हुई गड़बड़ियों का सीधा असर उन विद्यार्थियों पर पड़ा है, जिन्हें आगे प्रवेश, छात्रवृत्ति और अन्य शैक्षणिक प्रक्रियाओं के लिए सही अंकसूची की जरूरत है। गलत नाम, अंक, विषय और अन्य त्रुटियों ने हजारों परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। विभागीय लापरवाही का खामियाजा अब मासूम विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है।

13 जुलाई को ही जिला शिक्षा अधिकारी ने सातों ब्लॉकों के BEO को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि मार्कशीट की त्रुटियों को तत्काल सुधार लिया जाए। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने निर्देशों को गंभीरता से नहीं लिया। नतीजा यह हुआ कि समय निकल गया और गड़बड़ियां जस की तस बनी रहीं।

कलेक्टर के हस्तक्षेप के बाद शिक्षा विभाग हरकत में आया। सातों BEO को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। अब ब्लॉक स्तर के अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए मातहत कर्मचारियों और संकुल समन्वयकों पर कार्रवाई की तैयारी में जुट गए हैं। यानी गलती ऊपर हुई, लेकिन जिम्मेदारी नीचे तय करने की कवायद शुरू हो गई है।

सबसे ज्यादा परेशानी विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को हो रही है। कई छात्र कई दिनों से सही मार्कशीट के इंतजार में शिक्षा विभाग और स्कूलों के चक्कर काट रहे हैं। जिन बच्चों को आगे की पढ़ाई के लिए दस्तावेज जमा करने हैं, उनके सामने सबसे बड़ी मुश्किल खड़ी हो गई है।

सरकार लगातार बस्तर में शिक्षा व्यवस्था मजबूत करने और गुणवत्ता सुधारने के दावे करती रही है। लेकिन 2,380 मार्कशीट में हुई गड़बड़ी ने इन दावों की पोल खोल दी है। सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि बोर्ड पैटर्न की अंकसूची तक सही तरीके से तैयार नहीं हो सकती, तो शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता का आकलन कैसे होगा?

फिलहाल शिक्षा विभाग नोटिस जारी कर अपनी जिम्मेदारी निभाने का दावा कर रहा है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या सिर्फ कारण बताओ नोटिस से मामला खत्म हो जाएगा? या फिर इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर वास्तविक कार्रवाई होगी? अब पूरे बस्तर की नजर इस बात पर है कि बच्चों को त्रुटिरहित मार्कशीट कब मिलेगी और जिम्मेदार अफसरों पर क्या कार्रवाई होती है।