अटल बिहारी वाजपेयी की 14 लाख की प्रतिमा बारिश में क्षतिग्रस्त, जिम्मेदारों पर उठे सवाल

कोरबा : कटघोरा के अटल परिसर में स्थापित पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा अब राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद के केंद्र में आ गई है। करीब 14 लाख रुपए की लागत से लगाई गई इस प्रतिमा को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि जिस प्रतिमा को तांबे की बताकर स्थापित किया गया, वह पहली ही तेज बारिश के बाद अपना रंग छोड़ने लगी और उसके भीतर से सीमेंट जैसा ढांचा दिखाई देने लगा।
बारिश के बाद प्रतिमा की बाहरी परत कई जगह से उखड़ गई। इसके बाद स्थानीय लोगों ने दावा किया कि प्रतिमा तांबे की नहीं, बल्कि सीमेंट से तैयार की गई है और उसे तांबे जैसा दिखाने के लिए केवल कॉपर रंग का पेंट किया गया था। प्रतिमा की तस्वीरें सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी मामला तेजी से वायरल हो गया है।
अब सवाल केवल एक प्रतिमा का नहीं, बल्कि 14 लाख रुपए के सरकारी खर्च का भी है। यदि प्रतिमा वास्तव में तांबे की नहीं है, तो टेंडर में क्या शर्तें थीं? किस सामग्री का भुगतान किया गया? गुणवत्ता की जांच किसने की? निर्माण कार्य का सत्यापन किस अधिकारी ने किया? ऐसे कई सवाल अब प्रशासन के सामने खड़े हैं।
इस पूरे विवाद के बाद कटघोरा नगर पालिका अध्यक्ष विपक्ष के निशाने पर हैं। विपक्ष का आरोप है कि यह केवल सरकारी धन की बर्बादी नहीं, बल्कि देश के पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के सम्मान के साथ भी गंभीर खिलवाड़ है। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी तेज है कि नगर पालिका अध्यक्ष का नाम पहले भी DMF से जुड़े विवादों में सामने आ चुका है।
मामले ने राजनीतिक रंग भी पकड़ लिया है। भाजपा जिलाध्यक्ष ने पूरे घटनाक्रम पर कड़ी आपत्ति जताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर किसी भी तरह की अनियमितता या भ्रष्टाचार स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं। यदि जांच में यह साबित होता है कि तांबे के नाम पर सीमेंट की प्रतिमा लगाई गई और सरकारी राशि का दुरुपयोग हुआ, तो यह मामला केवल निर्माण में लापरवाही तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भ्रष्टाचार की गंभीर जांच का विषय बन सकता है। दूसरी ओर, यदि प्रतिमा की वास्तविक सामग्री अलग पाई जाती है, तो प्रशासन को भी सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करनी होगी।
फिलहाल इतना तय है कि इस बार बारिश ने सिर्फ शहर की धूल नहीं धोई, बल्कि 14 लाख रुपये के इस निर्माण पर भी ऐसे सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका जवाब अब जांच ही दे सकेगी।