कर्मचारी की बर्खास्तगी पर हाई कोर्ट सख्त: नियमों का पालन किए बिना नहीं हो सकती कार्रवाई, आरक्षक की बर्खास्तगी निरस्त

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बिलासपुर। बर्खास्तगी के खिलाफ आरक्षक द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट के जस्टिस संजय के अग्रवाल के सिंगल बेंच ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है, विभागीय जांच के बाद कर्मचारी को बर्खास्त करने के मामले में अपीलीय प्राधिकारी को नियमों के तहत अपील के सभी पहलुओं पर स्वतंत्र रूप से विचार करना जरूरी है। केवल अधीनस्थ अधिकारी के आदेश की पुष्टि कर देना पर्याप्त नहीं है। कोर्ट ने एसपी गरियाबंद, आईजी रायपुर और डीजीपी द्वारा पारित बर्खास्तगी आदेश को निरस्त कर दियाहै । कोर्ट ने मामले को डीजीपी के पास वापस भेजते हुए 60 दिनों के भीतर नियमानुसार नए सिरे से निर्णय लेने का निर्देश दिया है|

चंद्रकांत ध्रुव पुलिस विभाग में आरक्षक के पद पर कार्यरत था। दुराचरण के आरोप में उसके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई थी। जांच रिपोर्ट के बाद 16 अप्रैल 2018 को पुलिस अधीक्षक गरियाबंद ने आरक्षक को सेवा से बर्खास्त कर दिया।

बर्खास्तगी आदेश के खिलाफ आरक्षक चंद्रकांत ने आईजी रायपुर रेंज के समक्ष अपील पेश की। सुनवाई के बाद आईजी ने 29 अक्टूबर 2018 को अपील खारिज कर दी। आईजी के आदेश के बाद आरक्षक ने डीजीपी के समक्ष दया अपील प्रस्तुत की। डीजीपी ने 9 जुलाई 2019 को अपील खारिज करते हुए बर्खास्तगी के आदेश को बरकरार रखा।

पुलिस के आला अफसरों के आदेश को चुनौती देते हुए आरक्षक ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की। याचिका की सुनवाई जस्टिस संजय के अग्रवाल के सिंगल बेंच में हुई। याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता अनुनय कुमार श्रीवास्तव और अंकुर दीवान ने कहा, अपील पर निर्णय लेते समय छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 27(2) में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।

इस नियम के तहत अपीलीय प्राधिकारी को मुख्य रूप से यह देखना होता है कि विभागीय जांच में निर्धारित प्रक्रिया का पालन हुआ या नहीं और किसी प्रक्रियात्मक त्रुटि से न्याय प्रभावित हुआ या नहीं। इसके अलावा अनुशासनहीनता का निष्कर्ष रिकॉर्ड में उपलब्ध साक्ष्यों से साबित होता है या नहीं तथा लगाया गया दंड उचित है या अत्यधिक कठोर है, इस पर भी विचार करना जरूरी है।

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है, अपीलीय अधिकारी के लिए अपील का निपटारा महज औपचारिकता नहीं हो सकता। उसे रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री और नियमों के अनुरूप स्वतंत्र रूप से विचार कर कारणयुक्त आदेश पारित करना आवश्यक है। कोर्ट ने एसपी गरियाबंद का 16 अप्रैल 2018 का बर्खास्तगी आदेश, आईजी रायपुर का 29 अक्टूबर 2018 का अपीलीय आदेश और डीजीपी का 9 जुलाई 2019 का आदेश निरस्त कर दिया है। मामले को डीजीपी के पास नए सिरे से विचार के लिए भेजते हुए, संबंधित पक्षकारों को उचित सुनवाई का अवसर देने व नियम 27(2) के सभी पहलुओं पर विचार कर 60 दिनों के भीतर कानून के अनुसार नया आदेश पारित करने का निर्देश दिया है।

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