सुप्रीम कोर्ट का बड़ा असर: अब हर गुमशुदगी पर FIR अनिवार्य, पुलिस को तुरंत शुरू करनी होगी तलाश

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में अब नाबालिग, बालिग किसी के भी गुम होने पर पुलिस गुमशुदगी की रिपोर्ट कराने पहुंचे व्यक्ति को वापस नहीं लौटा सकेगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हर गुमशुदगी पर एफआईआर दर्ज करनी होगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हर गुमशुदगी पर एफआईआर दर्ज करनी होगी। शीर्ष अदालत के निर्देश के बाद देशभर में इस व्यवस्था को लागू कर दी गई है।
शीर्ष अदालत के निर्देश पर गौर करें तो, बालिग के मामले में बीएनएस की धारा 140 (3) और नाबालिग के मामले में धारा 137 के तहत एफआईआर होगी। पीएचक्यू ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए प्रदेशभर के एसपी को हर गुम इंसान के मामले में अनिवार्य रूप से एफआईआर दर्ज करने का निर्देश जारी कर दिया है। राज्य सरकार ने पुलिस आयुक्तों, आईजी, डीआईजी और एसपी को इसका सख्ती से पालन कराने कहा है।
शीर्ष अदालत के निर्देश के मद्देनजर राज्य सरकार द्वारा जारी किए पत्र पर छत्तीसगढ़ बिलासपुर जिले में अमल प्रारंभ हो गया है। सोमवार को जिले के मस्तूरी, तखतपुर और सरकंडा थाने में इसी तरह के प्रकरण में एक-एक मामले दर्ज किए गए। पीड़ितों की पहचान सार्वजनिक रूप से सामने ना आ पाए, पुलिस ने ऐतिहात बरतते हुए तीनों मामलों को सेंसेटिव रखा है। बता दें, शीर्ष अदालत के निर्देश से पहले पुलिस इस तरह के प्रकरणों में तत्काल रिपोर्ट दर्ज नहीं करती थी। परिजनों को खोजबीन की सलाह दी जाती थी। 24 घंटे बाद थाना आना की सलाह दी जाती थी। अब ऐसा नहीं होगा। पीड़ित पक्ष के थाना पहुंचने और जानकारी देने के बाद मामला दर्ज करना होगा और उसी अंदाज में खोजबीन भी शुरू करनी होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने जी. गणेश बनाम तमिलनाडु राज्य मामले में हर गुम इंसान, महिला या पुरुष की सूचना पर एफआईआर करने का निर्देश देशभर के राज्य सरकारों को दिया है। शीर्ष अदालत के फैसले का हवाला देते हुए राज्य सरकार ने पुलिस को तत्काल केस दर्ज कर कानूनी जांच और तलाश करने का निर्देश जारी कर दिया है। बता दें, इससे पहले 2012 में एक बड़ा बदलाव आया था, तब गुम नाबालिग बच्चों के मामलों में एफआईआर की व्यवस्था लागू की गई थी।