बिलासपुर में मंडराया बड़ा बिजली संकट, जर्जर हाईटेंशन टावर कभी भी गिरने का खतरा

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बिलासपुर। न्यायधानी बिलासपुर में बिजली आपूर्ति को लेकर गंभीर स्थिति सामने आई है। 132 केवी तिफरा पावर ग्रिड से नेहरू नगर उपकेंद्र तक बिजली पहुंचाने वाली मुख्य 33 केवी हाईटेंशन लाइन का एक बड़ा टावर जर्जर होकर खतरनाक स्थिति में पहुंच गया है। बापजी पार्क और शक्तिधाम के पास रेलवे ट्रैक को पार करने वाला यह टावर आधार से जंग लगने के कारण कमजोर हो चुका है और एक तरफ झुक गया है।

बताया जा रहा है कि यदि यह टावर गिरता है तो शहर के बड़े हिस्से की बिजली आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इससे कई इलाकों में जनजीवन प्रभावित होने की आशंका है।

विद्युत वितरण कंपनी के नेटवर्क में 33 केवी लाइन को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके बावजूद टावर के निचले हिस्से में लंबे समय से बारिश का पानी जमा होने के कारण लोहे के ढांचे में जंग लग गई। धीरे-धीरे इसका आधार कमजोर होता गया और अब टावर के ढहने का खतरा पैदा हो गया है।

टावर के गिरने की स्थिति में नेहरू नगर और मंगला सब-स्टेशन से जुड़े करीब 9 प्रमुख फीडरों की बिजली आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

हादसा होने की स्थिति में मंगला, दीनदयाल नगर, जेपी विहार, गंगा नगर, शुभम विहार, उसलापुर सहित आसपास के रिहायशी क्षेत्रों में बिजली संकट गहरा सकता है। वहीं नेहरू नगर, गणेश चौक, संजय तरण पुष्कर, इंदिरा नगर, मगध नगर और रिंग रोड से लगे इलाकों पर भी इसका असर पड़ सकता है।

इसके अलावा कलेक्टोरेट परिसर, जिला न्यायालय और सर्किट हाउस जैसे प्रमुख प्रशासनिक क्षेत्रों की बिजली आपूर्ति भी प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

तकनीकी जानकारों के अनुसार नेहरू नगर और मंगला उपकेंद्रों का लोड काफी अधिक है। ऐसे में यदि यह टावर गिरता है तो मौजूदा व्यवस्था में 132 केवी ग्रिड से इन क्षेत्रों की बिजली आपूर्ति बनाए रखने के लिए तत्काल कोई वैकल्पिक बायपास उपलब्ध नहीं है। इससे बिजली बहाली में काफी समय लग सकता है।

जानकारों के मुताबिक यह बिजली रूट पहले 11 केवी ‘टाउन टू’ फीडर के तौर पर इस्तेमाल होता था। शहर के विस्तार और बिजली की मांग बढ़ने के बाद इसे 33 केवी लाइन में अपग्रेड किया गया। आरोप है कि पुराने बुनियादी ढांचे पर बढ़ते लोड के बावजूद समय पर पर्याप्त रखरखाव नहीं हुआ, जिसके चलते टावर की स्थिति खराब होती चली गई।

विद्युत वितरण कंपनी के सिटी सर्किल के अधीक्षण अभियंता (एसई) पीएल सिदार ने बताया कि टावर के झुकने की शिकायत विभाग के संज्ञान में है। तत्काल सुरक्षा के लिए टावर में ‘स्टे’ लगाया गया है, ताकि वह अचानक न गिरे।

उन्होंने बताया कि चूंकि बिजली लाइन रेलवे ट्रैक के ऊपर से गुजरती है, इसलिए रेलवे अधिकारियों के साथ संयुक्त निरीक्षण किया जा चुका है और इसकी विस्तृत रिपोर्ट रेलवे को भेजी गई है।

एसई पीएल सिदार के अनुसार भविष्य में इस समस्या से स्थायी रूप से निजात पाने के लिए पूरी लाइन का रूट बदलकर उसे अंडरग्राउंड करने की योजना है। रेलवे से अंतिम स्वीकृति और अनुमानित लागत मिलने के बाद निर्धारित 15 प्रतिशत शुल्क जमा कराया जाएगा। इसके बाद रेलवे की ओर से निर्माण कार्य कराया जाएगा।

विभाग का प्रयास है कि प्रस्तावित कार्य को इसी महीने के भीतर पूरा कराया जाए, ताकि जर्जर टावर से पैदा हुए खतरे को स्थायी रूप से दूर किया जा सके।

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