गरियाबंद में नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को 20 साल की सजा, 25 हजार रुपए जुर्माना

गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय ने आरोपी को 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने आरोपी पर कुल 25 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया है।
मैनपुर थाना क्षेत्र के जाड़ापदर अंतर्गत ग्राम गोंदराबाहरा निवासी आरोपी बिसनाथ नेताम उर्फ बांडा को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश गंगा पटेल ने अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर दोषी ठहराया।
विशेष लोक अभियोजक (पॉक्सो) एचएन त्रिवेदी के मुताबिक, 14 अगस्त 2025 को नाबालिग के माता-पिता लकड़ी लेने जंगल गए थे। शाम को वापस लौटने पर उनकी बेटी घर पर नहीं मिली। आसपास और रिश्तेदारों के यहां तलाश करने के बाद अगले दिन मैनपुर थाने में उसके लापता होने की सूचना दी गई।
पुलिस ने मामले में तत्काल कार्रवाई करते हुए 16 अगस्त 2025 को नाबालिग को आरोपी के घर से बरामद किया।
पूछताछ के दौरान पीड़िता ने पुलिस को बताया कि आरोपी उसे फूटू खोजने के बहाने जंगल ले गया था। इसके बाद वह उसे अपने घर ले गया, जहां उसके साथ दुष्कर्म किया गया।
पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 137(2), 64 और पॉक्सो एक्ट की धारा 4 एवं 6 के तहत अपराध दर्ज कर न्यायालय में आरोप पत्र पेश किया। मामले की विवेचना निरीक्षक शिवशंकर हुर्रा और उपनिरीक्षक गुनेश्वरी नरेटी ने की।
अभियोजन पक्ष ने आरोप साबित करने के लिए न्यायालय में कुल 11 गवाहों के बयान कराए। प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के कथनों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी माना।
न्यायालय ने पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत 20 वर्ष का सश्रम कारावास और 10 हजार रुपए अर्थदंड, जबकि धारा 4(2) के तहत भी 20 वर्ष का सश्रम कारावास और 10 हजार रुपए अर्थदंड लगाया।
इसके अलावा भारतीय न्याय संहिता की धारा 137(2) के तहत आरोपी को 5 वर्ष के सश्रम कारावास और 5 हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई गई। इस तरह आरोपी पर कुल 25 हजार रुपए का अर्थदंड लगाया गया।