छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: सड़क हादसे में मृतक के परिवार को अब मिलेंगे 24.39 लाख रुपये

1154216-hc-high-court

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले व्यक्ति के परिजनों को बड़ी राहत दी है। जस्टिस संजय कुमार जायसवाल की सिंगल बेंच ने दुर्घटना मुआवजा मामले में मुआवजे की राशि बढ़ाकर 24 लाख 39 हजार 420 रुपये कर दी है। इससे पहले मृतक के आश्रितों को 17 लाख 40 हजार 760 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया गया था। हाई कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया है कि फैसले की जानकारी आश्रितों को हिंदी अथवा छत्तीसगढ़ी भाषा में लिखित रूप से दी जाए, ताकि वे आदेश को आसानी से समझ सकें।

यह मामला सड़क दुर्घटना में मृत रूप सिंह के आश्रितों से जुड़ा है। अपर मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, गरियाबंद ने 11 फरवरी 2026 को पारित अपने आदेश में परिवार को 17,40,760 रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया था। मुआवजे की राशि अपर्याप्त मानते हुए भारती ध्रुव एवं अन्य आश्रितों ने हाई कोर्ट में अपील दायर की थी।

अपील में मृतक की आय का कम आकलन किए जाने का मुद्दा उठाया गया। मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने मुआवजे की दोबारा गणना करते हुए कुल राशि 24,39,420 रुपये निर्धारित की। इस तरह परिवार को पहले से स्वीकृत राशि के अतिरिक्त 6,98,660 रुपये मिलेंगे।

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने छत्तीसगढ़ श्रम आयुक्त कार्यालय की न्यूनतम मजदूरी संबंधी अधिसूचना को आधार बनाकर मृतक की आय का पुनर्निर्धारण किया। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण ने मृतक की मासिक आय 7,800 रुपये मानी थी, जिसे हाई कोर्ट ने बढ़ाकर 10,100 रुपये कर दिया।

इस आधार पर मृतक की वार्षिक आय 1,21,200 रुपये निर्धारित की गई। अदालत ने मुआवजे की गणना करते समय भविष्य में आय वृद्धि और अन्य निर्धारित मदों को भी शामिल किया।

हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के प्रणय सेठी, सरला वर्मा और मगमा जनरल इंश्योरेंस से जुड़े फैसलों में निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार मुआवजे की पुनर्गणना की। इसमें भविष्य की आय में वृद्धि के लिए 40 प्रतिशत राशि जोड़ने के साथ अन्य मदों में भी संशोधन किया गया।

सभी मदों की गणना के बाद मुआवजे की कुल राशि 24,39,420 रुपये तय की गई। पहले से निर्धारित 17,40,760 रुपये घटाने पर आश्रितों को 6,98,660 रुपये अतिरिक्त मिलेंगे। इस अतिरिक्त राशि पर दावा आवेदन प्रस्तुत करने की तारीख से भुगतान होने तक 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी दिया जाएगा। अधिकरण के आदेश की अन्य शर्तें यथावत रहेंगी।

इस मामले में हाई कोर्ट ने आम लोगों की समझ और न्याय तक उनकी पहुंच को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण निर्देश भी दिया है। अदालत ने रजिस्ट्री को संबंधित क्षेत्र के विधिक सेवा प्राधिकरण के समन्वय और पैरालीगल वालंटियर्स की सहायता से मृतक के आश्रितों तक फैसले की जानकारी पहुंचाने को कहा है।

यह जानकारी देवनागरी लिपि में हिंदी अथवा छत्तीसगढ़ी भाषा में लिखित रूप से दी जाएगी, ताकि आश्रित मुआवजे से जुड़े आदेश और उन्हें मिलने वाली राशि को स्पष्ट रूप से समझ सकें।

अपीलकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता सीआर. साहू ने पैरवी की।

रीसेंट पोस्ट्स