चक्रवात ‘अर्नब’ का छत्तीसगढ़ में असर: कई जिलों में भारी बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट, प्रशासन अलर्ट मोड पर

andhi tufaan mausam

रायपुर। बंगाल की खाड़ी में उठे चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ का असर छत्तीसगढ़ में दिखाई देने लगा है। प्रदेश के कई जिलों में बुधवार सुबह से बारिश का दौर जारी है। कहीं रुक-रुककर बारिश हो रही है, तो कहीं तेज हवाओं के साथ भारी वर्षा ने जनजीवन प्रभावित करना शुरू कर दिया है। मौसम विभाग ने दक्षिण और मध्य छत्तीसगढ़ के कई जिलों में भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। कुछ इलाकों में हवा की रफ्तार 90 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की आशंका जताई गई है।

मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए राज्य सरकार ने सभी जिला कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं। संभावित प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए राहत और बचाव दलों को तैयार रखने के साथ ही जिला स्तर पर व्यवस्थाओं की लगातार समीक्षा की जा रही है। प्रशासनिक अधिकारी हालात पर नजर बनाए हुए हैं और संबंधित विभागों से तैयारियों की जानकारी ले रहे हैं।

चक्रवात के प्रभाव से रायपुर, रायगढ़ और गरियाबंद सहित कई जिलों में बारिश हो रही है। गरियाबंद में देर रात से लगातार वर्षा के साथ ठंडी हवाएं चल रही हैं। मौसम विभाग ने कोंडागांव, बस्तर, बीजापुर, दंतेवाड़ा और सुकमा में रेड अलर्ट जारी किया है।

अगले 24 घंटों के दौरान बालोद, बलौदाबाजार, बस्तर, बीजापुर, दंतेवाड़ा, धमतरी, दुर्ग, कांकेर, महासमुंद, नारायणपुर, रायपुर और सुकमा में कई स्थानों पर भारी से अति भारी बारिश होने की संभावना है। इस दौरान गरज-चमक और 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। कुछ स्थानों पर हवा की गति 90 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने का अनुमान है। तूफान का सबसे ज्यादा प्रभाव दक्षिण छत्तीसगढ़ में देखने को मिल सकता है।

खराब मौसम और भारी बारिश की आशंका को देखते हुए बस्तर संभाग के जगदलपुर सहित बस्तर और सुकमा जिले के स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है। गरियाबंद और दुर्ग में भी स्कूल बंद रखने का निर्णय लिया गया है। वहीं बिलासपुर जिले में 29 अक्टूबर को सभी शासकीय और अशासकीय स्कूलों में छुट्टी घोषित की गई है।

प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलें। नदी-नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूरी बनाए रखें तथा बिजली गिरने और तेज हवाओं के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहें।

चक्रवात के प्रभाव से प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का मिजाज बदल गया है।

  • रायपुर: सुबह से आसमान में बादल छाए रहे और बूंदाबांदी के साथ ठंडी हवाएं चलती रहीं।
  • बिलासपुर: सुबह से बादल छाए रहे। करीब 11 बजे से रुक-रुककर बारिश हुई।
  • रायगढ़ और गरियाबंद: सुबह से बारिश का दौर जारी रहा।
  • दुर्ग: बारिश के साथ ठंडी हवाओं ने मौसम में ठंडक बढ़ा दी।
  • पेंड्रा: गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में रेड अलर्ट के बीच घने बादल छाए रहे और तेज बारिश हुई।
  • कोरबा: बुधवार सुबह से काली घटाएं छाई रहीं। रिमझिम बारिश के चलते जनजीवन प्रभावित हुआ।
  • दंतेवाड़ा और गरियाबंद: मंगलवार शाम को आसमान में लालिमा दिखाई दी।

मौसम विभाग के मुताबिक, 27 अक्टूबर से ही प्रदेश में चक्रवात ‘अर्नब’ का प्रभाव दिखाई देने लगा था। रायपुर और बिलासपुर समेत कई जिलों में मंगलवार को आसमान में बादल छाए रहे। इसके चलते दिन का तापमान सामान्य से नीचे रहा और रात में ठंडी हवाएं चलती रहीं। बुधवार सुबह से भी प्रदेश के कई हिस्सों में बादल छाए रहे और बारिश शुरू हो गई।

दी गई मौसम संबंधी जानकारी के अनुसार, चक्रवात बुधवार तड़के आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम तट से टकराया। लैंडफॉल की प्रक्रिया करीब तीन घंटे तक चली। इस दौरान हवा की रफ्तार 125 से 135 किलोमीटर प्रति घंटे के बीच बताई गई।

चक्रवात के संभावित प्रभाव को देखते हुए रायपुर जिला प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों को सतर्क कर दिया है। ग्रामीण इलाकों में मुनादी के जरिए लोगों को भारी बारिश, तेज हवाओं, आकाशीय बिजली और जलभराव से बचाव के उपाय बताए जा रहे हैं।

राजस्व, पुलिस, स्वास्थ्य, नगरीय निकाय, पंचायत और बिजली विभाग के साथ SDRF, NDRF तथा फायर ब्रिगेड को भी तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। नदी-नालों, निचले इलाकों, कमजोर मकानों, पेड़ों और बिजली लाइनों की निगरानी की जा रही है। इसके अलावा जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त रखने को कहा गया है।

आपात स्थिति से निपटने के लिए कंट्रोल रूम सक्रिय किया गया है। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है। सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर 0771-2413233 जारी किया गया है।

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, गुरुवार 29 अक्टूबर को प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। उत्तर और मध्य छत्तीसगढ़ के कुछ स्थानों पर भारी से अति भारी बारिश की आशंका है। इस दौरान गरज-चमक के साथ 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। कुछ स्थानों पर हवा की गति 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने का अनुमान है।

संभावित बाढ़ और जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए बिलासपुर जिला प्रशासन ने स्थानीय स्तर पर बचाव दल तैयार करने की पहल की है। इसके तहत जिले के अलग-अलग अनुभागों और तहसीलों से चयनित 57 कोटवारों, मछुआरों, गोताखोरों और कुशल तैराकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

परसदा स्थित अग्निशमन, आपातकालीन सेवाएं एवं SDRF प्रशिक्षण केंद्र में 26 से 30 अक्टूबर तक पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया है। इसमें प्रतिभागियों को मोटर बोट (OBM) चलाने, पानी में डूब रहे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने, तैराकी की तकनीकों तथा लाइफ जैकेट और लाइफ ब्वॉय के इस्तेमाल का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

प्रशिक्षण का उद्देश्य आपदा के समय स्थानीय स्तर पर ही प्रशिक्षित लोगों की मदद से तत्काल राहत और बचाव कार्य शुरू करना है, ताकि प्रभावित लोगों तक समय पर सहायता पहुंचाई जा सके।

चक्रवात के संभावित प्रभाव को देखते हुए बिलासपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शुभा गरेवाल ने जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं। सिम्स, जिला चिकित्सालय, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में आपातकालीन तैयारियां सुनिश्चित की जा रही हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर विशेष कॉम्बैट टीमों का गठन किया है। इन टीमों के सदस्यों को किसी भी आपात स्थिति में तत्काल उपलब्ध रहने के निर्देश दिए गए हैं।

अस्पतालों में जलजनित बीमारियों, बुखार, उल्टी-दस्त और सर्पदंश के उपचार के लिए आवश्यक दवाइयों का पर्याप्त स्टॉक रखने को कहा गया है। ORS, क्लोरीन टैबलेट और ब्लीचिंग पाउडर की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जा रही है।

इसके अलावा 108 और महतारी एक्सप्रेस एम्बुलेंस सेवाओं को 24 घंटे सक्रिय रखते हुए हाई अलर्ट पर रखा गया है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जरूरत पड़ने पर अस्थायी स्वास्थ्य शिविर लगाने की तैयारी भी की गई है।

स्वास्थ्य विभाग ने 27 से 31 अक्टूबर के बीच प्रसव की संभावित तारीख वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान कर उन्हें सुरक्षित स्थानों पर रखने की व्यवस्था शुरू की है। आपदा प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाली प्रसव के नजदीक पहुंच चुकी महिलाओं को तूफान का प्रभाव बढ़ने से पहले नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र या जिला अस्पताल के प्रसूति वार्ड में शिफ्ट करने की तैयारी है।

अस्पतालों में ऑक्सीजन, जनरेटर बैकअप, जीवनरक्षक दवाइयों और प्रसव से संबंधित जरूरी सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि किसी भी आपात स्थिति में मरीजों को तत्काल उपचार उपलब्ध कराने के लिए सभी जरूरी व्यवस्थाएं की जा रही हैं।

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