23 साल के लड़के ने बनाया था, दुनिया का पहला कंप्यूटर वायरस… देख सबकी उड़ गई थी नींद!
Morris Worm| इंटरनेट हमारी जिंदगी का खास हिस्सा है, आज के समय में बच्चे से लेकर बड़े बूढ़े तक इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इंटरनेट की शुरुआत में ही उस पर एक बड़ा साइबर हमला हुआ था जिसने पूरी दुनिया के तकनीकी जगत को हिला दिया था? यह हमला था मॉरिस वर्म (Morris Worm) का, जिसे इंटरनेट पर फैलने वाला पहला बड़ा कंप्यूटर वायरस माना जाता है.
बात है 2 नवंबर 1988 की रात की, रात करीब 8:30 बजे मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) के एक कंप्यूटर से एक प्रोग्राम इंटरनेट पर छोड़ा गया. यह प्रोग्राम साधारण नहीं था बल्कि बेहद खतरनाक वायरस था. रॉबर्ट टैपन मॉरिस नाम के एक 23 साल के कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के छात्र ने एक प्रोग्राम बनाया और उसे MIT के एक कंप्यूटर से इंटरनेट पर छोड़ा. मॉरिस का दावा था कि वह सिर्फ इंटरनेट की सुरक्षा को परखना चाहता था, लेकिन उसका यह प्रयोग अनजाने में एक बड़े खतरे में बदल गया.
मॉरिस वर्म एक ऐसा प्रोग्राम था जो अपने आप फैलता था. इसे ‘वर्म’ इसलिए कहा गया क्योंकि यह एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर में बिना किसी की मदद के पहुंच जाता था. यह प्रोग्राम इंटरनेट से जुड़े कंप्यूटरों की कमजोरियों का फायदा उठाकर उनकी सिस्टम फाइल्स में घुस जाता और खुद की कई कॉपियां बनाता. लेकिन मॉरिस ने अपने प्रोग्राम में एक गलती कर दी थी. उसने सोचा था कि वर्म धीरे-धीरे फैलेगा, लेकिन यह इतनी तेजी से फैला कि कुछ ही घंटों में हजारों कंप्यूटरों को प्रभावित कर दिया.
उस समय इंटरनेट पर लगभग 60,000 कंप्यूटर जुड़े हुए थे, मॉरिस वर्म ने इनमें से लगभग 10% यानी 6,000 कंप्यूटरों को प्रभावित किया…
पासवर्ड अनुमान लगाना (Password Guessing)– यह प्रोग्राम कई संभावित पासवर्ड आजमाकर सिस्टम में घुसने की कोशिश करता था.
ईमेल प्रोग्राम की खामी (Sendmail Vulnerability)– उस समय ईमेल प्रोग्राम में एक बग था, जिसका इस्तेमाल करके यह वायरस बिना पासवर्ड के भी सिस्टम में घुस सकता था.
एक बार किसी कंप्यूटर में घुसने के बाद यह प्रोग्राम खुद को बार-बार कॉपी करता और आगे फैलता जाता.
जैसे ही मॉरिस वर्म का असर दिखाई दिया, विशेषज्ञों ने इसे रोकने की कोशिश शुरू कर दी. लेकिन वर्म को रोकना आसान नहीं था, क्योंकि यह बार-बार खुद की कॉपियां बनाता था. कई विश्वविद्यालयों और शोध केंद्रों को अपने कंप्यूटर सिस्टम को इंटरनेट से डिस्कनेक्ट करना पड़ा. इस घटना ने इंटरनेट की कमजोरियों को उजागर कर दिया. विशेषज्ञों ने दिन-रात काम करके वर्म को समझा और उसे हटाने के तरीके ढूंढे.
100,000 से 10 मिलियन डॉलर तक का नुकसान
जांच में पता चला कि इस वर्म के पीछे रॉबर्ट मॉरिस का हाथ था. मॉरिस ने बाद में माना कि उसका इरादा नुकसान पहुंचाना नहीं था बल्कि वह इंटरनेट की सुरक्षा की खामियों को उजागर करना चाहता था. लेकिन उसकी गलती ने लाखों डॉलर का नुकसान किया. अनुमान है कि इस वर्म की वजह से 100,000 से 10 मिलियन डॉलर तक का नुकसान हुआ, क्योंकि कई सिस्टम्स को ठीक करने और डेटा रिकवर करने में भारी खर्च आया.
मॉरिस को क्या सजा मिली?
1989 में मॉरिस पर मुकदमा चला. वह अमेरिका में कंप्यूटर फ्रॉड और दुरुपयोग अधिनियम (Computer Fraud and Abuse Act) के तहत मुकदमा झेलने वाले पहले व्यक्ति बने. उन्हें तीन साल की प्रोबेशन, 400 घंटे की सामुदायिक सेवा और 10,000 डॉलर का जुर्माना भरना पड़ा. हालांकि, मॉरिस ने बाद में अपनी जिंदगी में सुधार किया.